सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में नए सत्र के शुरुआत में “हिस्ट्री इन हैडलाइंस: 100 साल 100 सुर्खियां” विषय पर अनूठी प्रदर्शनी शुरू हुई। इस प्रदर्शनी में भारत के पिछले सौ वर्षों की महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रमुख समाचार पत्रों के फ्रंट पेज के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इसमें जलियांवाला बाग हत्याकांड, भगतसिंह की फांसी, 15 अगस्त 1947 की स्वतंत्रता, गांधी जी की हत्या, भारत–चीन युद्ध, चंद्रमा पर भारत का पहुंचना, आपातकाल और अन्य ऐतिहासिक घटनाओं के दुर्लभ कवरेज शामिल हैं।

प्रदर्शनी के मुख्य अतिथि थे प्रसिद्ध चिंतक एवं ऑर्गेनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर, प्रदेश के चुनाव आयुक्त मनोज श्रीवास्तव, संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक मुकेश मिश्र। कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने बताया कि प्रदर्शनी में 1920 से 2024 तक के प्रमुख समाचार पत्रों के 3 फीट आकार के फ्रंट पेज पूर्णत: पठनीय हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रदर्शनी न केवल ब्रिटिश भारत और स्वाधीन भारत की प्रमुख घटनाओं को दर्शाती है, बल्कि भारतीय पत्रकारिता के विकास और उसकी भूमिका को समझने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि यह प्रदर्शनी भारतीय पत्रकारिता का जीवंत इतिहास है और छात्रों के लिए इसे जानना बहुत आवश्यक है। मनोज श्रीवास्तव ने इस प्रयास की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि भविष्य में यह प्रदर्शनी यह भी दिखाए कि समय-समय पर मीडिया और पत्रकारिता ने अपनी भूमिका कैसे बदली।
श्रीराम तिवारी ने इसे इतिहास से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया, जबकि डॉ. मुकेश मिश्रा ने इसे शोध और संदर्भ के दृष्टिकोण से अत्यंत उपयोगी बताया। कुलगुरु ने छात्रों को प्रेरित किया कि वे विभिन्न अंचलों के समाचार पत्रों के प्रमुख पृष्ठ खोजकर इस प्रदर्शनी का विस्तार करें।
प्रदर्शनी में उदंत मार्तंड, कर्मवीर, वीर अर्जुन, लीडर, भारत, संसार, अमर उजाला, नई दुनिया, दैनिक जागरण, स्वदेश, फ्री प्रेस, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, युग धर्म, अमृत बाजार पत्रिका जैसे कई अखबारों के मुखपृष्ठ शामिल हैं, जिनमें कुछ अब भी प्रकाशित हो रहे हैं और कुछ बंद हो चुके हैं। यह प्रदर्शनी पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से बल्कि अनुसंधान और मीडिया अध्ययन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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