सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के सभागार में 76 वें संविधान दिवस के अवसर पर एक व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एल.पी. झारिया उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलगुरु मिलिंद दांडेकर ने की,साथ ही इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुशील मंडेरिया भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलगुरु ने सभागार में उपस्थित सभी सदस्यों को संविधान की शपथ भी दिलाई।

76 वें संविधान दिवस के अवसर पर प्रो. एल.पी. झारिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि, भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है साथ ही यह संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया था और 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की प्रथम बैठक हुई थी। 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत करने के पश्चात, 26 जनवरी 1950 को भारत देश में लागू किया गया। डॉ. झारिया ने बताया कि, संविधान को बनाने में भारत के विभिन्न विद्वानों द्वारा दुनिया के लगभग 158 देशों के संविधानों का अध्ययन करने के पश्चात उसके वह प्रावधान जो भारत में उपयोगी हो सकते थे उनको संविधान में शामिल किया। भारत का संविधान एक ऐसा संविधान है,जो भारत की प्रकृति के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि संविधान नियमों एवं कानून का ऐसा संग्रह है, जिससे राज्य का संचालन होता है। भारत प्रांतों का एक संघ है इसमें देश की संप्रभुता केंद्र सरकार के पास रहती है। इस अवसर पर उन्होंने संविधान के उद्देशिका को भी पढ़ा और उसकी व्याख्या की। डॉ. झारिया ने बताया कि, 42 वें संविधान संशोधन के जरिए हमारे उद्देशिका में समाजवादी,पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्दों को जोड़ा गया। संविधान दिवस मनाने का उद्देश्य यह है कि, हम सब लोग संविधान के प्रति अपनी आस्था एवं प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करें। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि, डॉ. अंबेडकर एक महानायक थे जिन्होंने पूरे विश्व को एक नयी दृष्टि दी। उन्होंने स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुता को संविधान में स्थापित किया। डॉ. झारिया ने कहा कि, हमें राज्य द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना चाहिए। हमारे संविधान में अनुच्छेद 14 से लेकर 32 तक मौलिक अधिकार दिए गए हैं। अगर किसी नागरिक के अधिकारों का हनन होता है तो, उसके विरुद्ध न्याय प्राप्त करने के लिए वह न्यायपालिका के शरण में जा सकता है। उन्होंने कहा कि, हमारे देश में एकात्म न्याय व्यवस्था है। यहां व्यवस्थापिका एवं कार्यपालिका में सामंजस्य रहता है। हमारे लिए यह चिंतन का विषय है की जिन उद्देश्यों को लेकर संविधान का निर्माण किया गया था, क्या वह पूर्ण हुए हैं ? इस पर हमें आत्म मंथन करना चाहिए, और उसे पूर्ण करने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि, राजनीति शासन चलाने की एक कला है। अगर इसमें शिक्षित और अच्छे लोग आएंगे तो यह हमारे देश के लिए उत्तम होगा। भारत का संविधान सभी धर्म को समान रूप से विकास करने का अवसर प्रदान करता है। भारत देश का अपना कोई धर्म नहीं है। सामाजिक एवं धार्मिक समरसता बंधुता स्थापित करने की आज अत्यधिक आवश्यकता है। हमें नागरिक होने के नाते हमारे संविधान और कानून की आवश्यक जानकारी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि, हमें संविधान के प्रति आस्था रखने,उसे जानने और लागू करवाने में सहयोग प्रदान करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलगुरु मिलिंद दांडेकर ने कहा कि, भारत का संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है। हमारे साथ लगभग 50 देश स्वतंत्र हुए, इनमें से केवल हमारे देश में ही लोकतंत्र बचा हुआ है। उन्होंने बताया कि, हमारे हजारों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत, साथ में सामंजस्य से रहने की परंपरा और हमारे जीवन मूल्यों के कारण ही हम लोकतंत्र के रास्ते पर चलते रहे। प्रो. दांडेकर ने कहा कि, हमारे हजारों वर्षों के जीवन मूल्यों का प्रकटी कारण ही हमारे संविधान में हुआ है।
कार्यक्रम में उपस्थित विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. सुशील मंडेरिया ने कहा कि, भारत के संविधान से प्रेरणा लेकर कई देशों के संविधान बने हैं।
इस अवसर पर भारत में हुए 26 नवंबर 2008 के आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए उपस्थित सभी जनों ने मौन रखकर श्रद्धांजलि व्यक्त की ।
कार्यक्रम का संचालन मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सहायता विभाग के निदेशक रतन सूर्यवंशी ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के कर्मचारी,अधिकारी और विद्यार्थीगण मौजूद रहे।
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