सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय केंद्र भोपाल द्वारा अध्ययन केंद्र क्रमांक 111 के विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों से संबंधित विभिन्न सेवाओं के बारे में क्षेत्रीय निदेशक रतन सूर्यवंशी तथा क्षेत्रीय उपनिदेशक शैलेंद्र कौशिक द्वारा जानकारी दी गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नव प्रवेशित विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों के विभिन्न प्रश्नों का जवाब भी विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा दिया गया।


दीक्षारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं वक्ता भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई के प्रो चेतन सिंह सोलंकी थे।उन्होंने अपने वक्तव्य में वायु, पानी, भोजन, मिट्टी आदि का जीवन में महत्व को विद्यार्थियों को समझाया। उन्होंने विश्व के विभिन्न देशों में जीडीपी वृद्धि के अंधानुकरण पर भी प्रकाश डाला। प्रो सोलंकी ने कहा कि, जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। मानव प्रजाति को इस धरती पर आए लगभग 3 लाख वर्ष हुए हैं, लेकिन पिछले लगभग 200 वर्षों से जलवायु परिवर्तन इतनी तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि, जलवायु परिवर्तन मनुष्य जीवन के अस्तित्व का प्रश्न है। जलवायु परिवर्तन तब से तेजी से हुआ है जब से मनुष्य के हाथ में ऊर्जा के साधन आए हैं। अधिकतर ऊर्जा के साधन हाइड्रोकार्बन आधारित होते हैं। इसलिए इनके इस्तेमाल से कार्बन आधारित गैसें निकलती हैं, जो कि वातावरण में फैलती हैं और उसे न सिर्फ प्रदूषित करती हैं बल्कि वातावरण की गर्मी को भी बढ़ती हैं। प्रो सोलंकी ने बताया कि, इस समय वातावरण में 52% से अधिक कार्बन डाइ ऑक्साइड है। हमारी धरती का तापमान लगभग 2.5 डिग्री बढ़ चुका है और इसी के कारण से हमें विभिन्न प्रकार के जलवायु परिवर्तनों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि, जलवायु परिवर्तन के लिए हम मनुष्य ही जिम्मेदार हैं और इसे ठीक करने की जिम्मेदारी भी विश्व के प्रत्येक मनुष्य की है। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों को कहा कि, हर वह चीज जिसके बिना जीवन चल सकता है, वह प्रगति पर है, और वह चीज जिनके बिना जीवन नहीं चल सकता है उनकी दुर्गति हो रही है। प्रो सोलंकी ने कहा कि, आधुनिक मानव से बड़ा मूर्ख जीव इस धरती पर पैदा नहीं हुआ है।
आज हर वर्ष कार्बन उत्सर्जन बढ़ता जा रहा है। इसे ठीक करने के जो उपाय परंपरागत रूप से सुझाए गए हैं, जैसे नीति निर्माण करना, तकनीकी उन्नयन करना, आर्थिक वृद्धि करना, इन सब से यह समस्या हल नहीं हो रही है बल्कि बढ़ती ही जा रही है। प्रो सोलंकी ने कहा कि, हमारी धरती और उसके संसाधन सीमित हैं तो हमारी ज़रूरतें भी सीमित करना होगी। हमारी कमाई बढ़ाने के साथ क्रय शक्ति तो बढ़ जाती है किंतु धरती की सप्लाई करने की क्षमता नहीं बढ़ती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि, एक यूनिट बिजली बनाने के लिए लगभग 1 किग्रा कार्बन का उत्सर्जन होता है, और यह कार्बन वातावरण में लगभग 300 वर्षों तक बना रहता। हमारे आज के कार्बन उत्सर्जन का परिणाम हमारे आने वाली 10 पीढ़ियां भुगतेगी। उन्होंने आवाहन किया कि, हमें अपने ऊर्जा के उपभोग को कम करना चाहिए और केवल हमें ही नहीं बल्कि विश्व के प्रत्येक मनुष्य को अपनी ज़रूरतें कम करनी होगी। इसके लिए एक जन आंदोलन की जरूरत है। एनर्जी स्वराज फाउंडेशन के संस्थापक चेतन सिंह सोलंकी ने कहा कि, वह शीघ्र ही फाइनाइट अर्थ मूवमेंट चालू करने वाले हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों का आवाहन किया कि, आप इस आंदोलन से जुड़े और अपने साथ काम से काम 10 और लोगों को भी जोड़ें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु संजय तिवारी द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय केंद्र भोपाल के निदेशक रतन सूर्यवंशी ने किया। साथ ही कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुशील द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षकगण उपस्थित थेl

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