सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 के अवसर पर विज्ञान में हिंदी की उपयोगिता और महत्व – भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में विषयक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं अतिथि प्रो. चेतन सिंह सोलंकी थे, जिन्हें भारत में सौर पुरुष के नाम से जाना जाता है। प्रो. सोलंकी ने जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपभोग पर प्रकाश डालते हुए छात्रों और उपस्थित जनसमूह को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 25% वैश्विक आबादी पानी की कमी से जूझ रही है और अगले 25 वर्षों में पृथ्वी का तापमान 2 डिग्री बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन लोगों के द्वारा उत्पन्न समस्या है और इसे हल करने की जिम्मेदारी भी लोगों पर ही है। कार्यक्रम में उन्होंने उपभोग कम करने की शपथ छात्रों और उपस्थित लोगों से दिलवाई और अपने जन अभियान के माध्यम से लोगों को जोड़ा। बीज वक्ता के रूप में रतन सूर्यवंशी ने विज्ञान के महत्व और भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोविड काल में भारत ने वैक्सीन विकसित कर वैश्विक मानवता की सेवा की और यह दर्शाता है कि विज्ञान के साथ परंपरा और मानव कल्याण जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु मिलिंद दांडेकर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विषयों का समग्र अध्ययन होता था और समग्र दृष्टिकोण से शिक्षा प्राप्त करना आज की आवश्यकता है। उन्होंने मातृभाषा में विज्ञान अध्ययन और शोध की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में विशेष शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए काव्य पाठ और वाद-विवाद प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। आयोजन मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर द्वारा किया गया, जिसका संचालन भारती शर्मा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम ने वैज्ञानिक चेतना, पर्यावरण जागरूकता और भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता को व्यापक रूप से सामने रखा।

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