सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :  भारत के ऊर्जा आयात को लेकर एक नई स्थिति सामने आई है। खबर है कि भारत अब रूस से कच्चा तेल (Crude Oil) पहले की तरह भारी छूट पर नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत अधिक कीमत पर खरीद सकता है। वैश्विक बाजार में बदलते हालात, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति की अनिश्चितता के कारण भारत को यह रणनीतिक फैसला लेना पड़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूस ने एशियाई देशों, खासकर भारत और चीन को भारी छूट पर तेल बेचना शुरू किया था। उस समय भारत ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल खरीदा। इससे भारत के तेल आयात बिल को काफी राहत मिली थी और रिफाइनरियों को भी सस्ता कच्चा माल मिला था। हालांकि अब वैश्विक बाजार में परिस्थितियां बदल रही हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार रूसी तेल पर दी जाने वाली छूट कम हो रही है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, बीमा और भुगतान से जुड़ी जटिलताओं के कारण भी कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में भारत को रूसी तेल पहले की तुलना में ज्यादा कीमत पर खरीदना पड़ सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना है। देश अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए भारत अलग-अलग देशों से तेल खरीदकर अपने स्रोतों को विविध बनाए रखने की रणनीति अपनाता है। सरकार का कहना है कि भारत का मुख्य लक्ष्य सस्ता और भरोसेमंद तेल हासिल करना है, चाहे वह किसी भी देश से मिले। अगर रूस से मिलने वाला तेल प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध रहेगा, तो भारत वहां से खरीद जारी रखेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले महीनों में वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में भारत को कीमत, आपूर्ति और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाकर फैसले लेने होंगे।

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