सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और तेल आपूर्ति संकट के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से करीब 3 करोड़ (30 मिलियन) बैरल कच्चा तेल खरीदने का समझौता किया है। यह खरीद उस समय की गई है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने भारत को अस्थायी तौर पर 30 दिनों की छूट दी है, जिसके बाद भारतीय कंपनियों ने रूसी तेल के कई कार्गो खरीद लिए। यह तेल पहले से समुद्र में मौजूद टैंकरों में लदा हुआ था और खरीदार की तलाश में था। बताया जा रहा है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने इस खरीद में प्रमुख भूमिका निभाई है। इनमें से प्रत्येक कंपनी ने लगभग 1-1 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदने का सौदा किया है, जबकि बाकी मात्रा अन्य भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां खरीद रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान-इजराइल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े जोखिम के कारण मध्य-पूर्व से तेल आपूर्ति बाधित हो रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है, इसलिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करना जरूरी हो गया। इसी कारण भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदकर अपने भंडार को सुरक्षित करने की रणनीति अपनाई है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी लगभग 88% तेल जरूरतें आयात से पूरी करता है। ऐसे में वैश्विक संकट के दौरान ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखना सरकार और तेल कंपनियों की प्राथमिकता बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि रूस से इस बड़ी खरीद के बाद भारत को कुछ समय तक तेल आपूर्ति में राहत मिलेगी और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनी रहेगी।
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