सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में संघर्ष की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) दोनों बेंचमार्क में तेज बढ़त देखी गई है। निवेशक संभावित आपूर्ति संकट को लेकर सतर्क हो गए हैं, क्योंकि ईरान वैश्विक तेल उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और होरमुज जलडमरूमध्य से बड़ी मात्रा में तेल की ढुलाई होती है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है। तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले दिनों में ईंधन की खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है। वित्तीय बाजारों में भी अस्थिरता देखी गई है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, जबकि सोने जैसी सुरक्षित निवेश संपत्तियों की मांग में वृद्धि हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तनाव को कम करने के प्रयासों में जुटा है। विश्लेषकों का मानना है कि कूटनीतिक समाधान ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता ला सकता है। फिलहाल निवेशकों और उपभोक्ताओं की नजरें पश्चिम एशिया की ताजा स्थिति पर टिकी हुई हैं।

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