सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /   आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल  :    बांग्लादेश में अगले साल फरवरी में होने वाले आम चुनाव पर असमंजस बढ़ गया है। राजनीतिक तनाव, हिंसा और सेना में हलचल के कारण चुनाव की तैयारी रुक गई है। अवामी लीग पर चुनाव आयोग ने पंजीकरण निलंबित किया हुआ है, जबकि विपक्षी बीएनपी तैयारी में लगी हुई है। वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने चेतावनी दी है कि बिना सुधार चुनाव नहीं होंगे।

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल के आदेश पर 15 वरिष्ठ सैन्य अफसरों की गिरफ्तारी से सेना में गुटबंदी खुलकर सामने आई है। एक गुट सरकार के साथ खड़ा है और राजनीतिक स्थिरता के लिए समर्थन दे रहा है, जबकि दूसरा गुट सेना को राजनीति से दूर रखने की मांग कर रहा है। ढाका कैंटोनमेंट की MES बिल्डिंग-54 में इन अफसरों को अस्थायी जेल में रखा गया है।

देश में पिछले 10 महीनों में 253 भीड़ हमले हुए, जिनमें 163 मौतें और 312 घायल हुए। धार्मिक हिंसा भी बढ़ी है, खासकर हिंदू अल्पसंख्यकों पर। पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन को कई बार सेना की मदद लेनी पड़ी। राजनीतिक सहमति और सुरक्षा की कमी के कारण निष्पक्ष चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर बैन से सरकार पर दबाव बढ़ा है। वहीं, जुलाई नेशनल चार्टर को लागू किए बिना चुनाव न कराने की मांग कई दल उठा रहे हैं।

बांग्लादेश में संसद की 350 सीटें हैं, जिसमें 50 आरक्षित हैं और 300 सीटों के लिए आम चुनाव होते हैं। प्रधानमंत्री ही सरकार का मुखिया होता है और राष्ट्रपति औपचारिक पद है।

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