सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : देश में आवासीय सीढ़ी के सबसे जरूरी शुरुआती पायदान खोते जा रहे हैं — इसको लेकर बीसीडी ग्रुप के उपाध्यक्ष एवं सीईओ और सीआईआई रियल एस्टेट कमेटी के चेयरमैन अश्विंदर आर. सिंह ने भारत में घटते सस्ती आवास आपूर्ति पर गंभीर चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा, “सस्ती आवासीय परियोजनाएं कोई द्वितीय श्रेणी की सोच नहीं हैं, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर को इसे अपनाना ही होगा।”
हालाँकि भारत में घरों की भारी कमी है, फिर भी डेवलपर्स अब ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों से मुँह मोड़ रहे हैं। अश्विंदर सिंह बताते हैं कि यह रुझान सिर्फ कम मुनाफा या कठिन रेगुलेटरी बोझ की वजह से नहीं है, बल्कि उद्योग के भीतर बजट हाउसिंग को नीचा देखने की मानसिकता भी इसके लिए ज़िम्मेदार है।
उन्होंने कहा, “जब एक साथी डेवलपर ने मुझसे हाल ही में पूछा, ‘तुम बजट प्रोजेक्ट्स से आगे कब बढ़ोगे?’ तो उसे लगा कि वह मुझे प्रेरित कर रहा है।” यह इस बात का उदाहरण है कि किस तरह सस्ती हाउसिंग को कमतर समझा जाता है।
आंकड़े एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं —
2025 की पहली छमाही में भारत के आठ प्रमुख शहरों में बेचे गए लगभग आधे घरों की कीमत ₹1 करोड़ से अधिक थी (Knight Frank India के अनुसार)।
वहीं, 15 टियर-2 शहरों में 2025 की पहली तिमाही में सस्ती हाउसिंग लॉन्च 67% घट गए (PropEquity)।
यहाँ तक कि सात बड़े महानगरों में भी ₹50 लाख से कम की यूनिट्स की बिक्री 2024 में 14% घटी, जबकि कुल आवास बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर रही।
सिंह ने इस स्थिति को “ट्रिपल पेनल्टी” कहा:
कम मार्जिन और ऊँची लागत के कारण बजट प्रोजेक्ट्स में जोखिम अधिक है।
ब्रांड वैल्यू को कमजोर करने वाला माना जाता है, जिससे प्राइसिंग पावर घटती है।
बैंक और फंड बजट हाउसिंग में पूंजी निवेश करने में हिचकिचाते हैं, जबकि प्रीमियम प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता मिलती है।
वह यह भी कहते हैं कि बजट प्रोजेक्ट्स को हाई-एंड परियोजनाओं के बराबर ही रेगुलेटरी बोझ झेलना पड़ता है, जिससे उनका प्रबंधन और भी कठिन हो जाता है।
2022 में क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी स्कीम के समाप्त हो जाने और राज्यों के प्रोत्साहनों में असंगठित रवैये के चलते इस सेगमेंट की आर्थिक स्थिरता और भी प्रभावित हुई है।
फिरभी, बाजार में सस्ती हाउसिंग की भारी मांग बनी हुई है।
CII–NAREDCO के अनुसार,
शहरी क्षेत्रों में 73% नई हाउसिंग डिमांड ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों की है,
मुख्य रूप से ऐसे मिलेनियल परिवारों द्वारा, जो ऑफिस से कम दूरी पर घर चाहते हैं।
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