पृथ्वी की जलवायु को नियंत्रित करने वाला महत्त्वपूर्ण कारक ध्रुवीय क्षेत्रों में तैरती समुद्री बर्फ की मात्रा है। हालांकि, बदलते वायुमंडलीय पैटर्न और बढ़ते तापमान के कारण, यह घटकर 15-76 मिलियन वर्ग किमी के रिकॉर्ड निम्न स्तर पर आ गया है। वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही है, समुद्री धाराएँ अशांत हो रही हैं तथा इस गिरावट के कारण चरम मौसम की घटनाएँ और भी बदतर हो गई हैं।
वैश्विक तापमान में वृद्धि और इसके प्रभाव
औद्योगिक क्रांति के बाद से मानवीय गतिविधियों विशेष रूप से जीवाश्म ईंधनों के जलने के कारण ग्रीनहाउस गैसों की वायुमंडलीय सांद्रता में तीव्र वृद्धि हुई है। मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसें गर्मी को रोक लेती हैं और जैसे-जैसे उनकी सांद्रता बढ़ती है, पृथ्वी को गर्म करती हैं। परिणामस्वरूप पृथ्वी पर हवा और महासागर गर्म हो जाते हैं। भूमि पर बर्फ पिघलती है, मौसम का पैटर्न बदलता है तथा जलचक्र इस तापमान वृद्धि से प्रभावित होता है।
चरम मौसम की घटनाएँ
बढ़ते तापमान के कारण भीषण वन्य आग, वर्षों तक चलने वाला सूखा, भारी वर्षा, भयंकर बाढ़, समुद्र में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की लहरें तथा तूफानों के दौरान व्यापक बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है।
पर्यावरणीय संकट और समुद्री जलस्तर में वृद्धि
समुद्र स्तर में वृद्धि के कारण तटीय अवसंरचना, जैसे जल आपूर्ति, सड़कें, पुल और अन्य संरचनाएँ खतरे में हैं। तटीय कटाव और उच्च ज्वार के कारण बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शोध से पता चलता है कि कुछ समुदाय वर्ष 2100 तक समुद्र तल पर या उससे नीचे पहुँच जाएंगे।
जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियाँ
ग्लोबल वार्मिंग – औद्योगिक गतिविधियों के कारण कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में वृद्धि।
चरम मौसम घटनाएँ – तूफान, सूखा और अत्यधिक वर्षा की बढ़ती आवृत्ति।
वन्यजीव और पारिस्थितिकी तंत्र – समुद्री बर्फ के पिघलने से ध्रुवीय भालू, सील और अन्य जीवों का प्राकृतिक आवास संकट में।
प्राकृतिक संसाधनों पर प्रभाव – अमेज़न के जंगलों की कटाई से कार्बन अवशोषण क्षमता कम हो रही है।
समुद्री बर्फ का घटता स्तर
समुद्री बर्फ में वैश्विक गिरावट के लिए मुख्य रूप से महासागरीय ऊष्मा परिवहन ज़िम्मेदार है। अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (एएमओसी) द्वारा गर्म पानी आर्कटिक में लाया जाता है, जो बर्फ की स्थिरता को कम करता है। 2015-2016 की अल नीनो घटना ने समुद्र के तापमान में वृद्धि करके अंटार्कटिका के समुद्री बर्फ को रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुँचा दिया।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा – कोयला, तेल और गैस के स्थान पर सौर, पवन और जल ऊर्जा का उपयोग।
वृक्षारोपण और वन संरक्षण – अधिक पेड़ लगाने और वनों की कटाई को रोकने की पहल।
सतत शहरी विकास – जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढाँचा विकसित करना।
समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण – समुद्री प्रदूषण को रोकना और समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग।
निष्कर्ष
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव न केवल पर्यावरण पर बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा पड़ रहा है। इससे निपटने के लिए हमें सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। सामूहिक प्रयासों और जागरूकता के माध्यम से ही हम इस वैश्विक संकट का समाधान निकाल सकते हैं।