सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य को लेकर सरकार और शोध अध्ययनों के बीच मतभेद सामने आए हैं। सरकार का कहना है कि AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। हालांकि, हालिया रिसर्च में यह दावा किया गया है कि खराब हवा के लगातार संपर्क में रहने से लोगों की फेफड़ों की क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ता वायु प्रदूषण सांस से जुड़ी समस्याओं, एलर्जी और लंबे समय में क्रॉनिक रेस्पिरेटरी इश्यू का कारण बन सकता है। शोध में यह भी बताया गया है कि प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर होता है। वहीं, सरकार का तर्क है कि अभी तक ऐसे निर्णायक वैज्ञानिक सबूत नहीं हैं जो AQI को सीधे फेफड़ों की बीमारी से जोड़ते हों।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि भले ही बीमारी तुरंत सामने न आए, लेकिन लंबे समय तक खराब हवा में सांस लेने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। यही वजह है कि मास्क, एयर प्यूरीफायर और प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर जोर दिया जा रहा है।
यह बहस ऐसे समय में सामने आई है, जब देश के कई बड़े शहरों में AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि नीतिगत फैसलों में रिसर्च निष्कर्षों को गंभीरता से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा हो सके।