सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल  : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर (Anupam Kher) आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने एक लंबा और संघर्षपूर्ण सफर तय किया है। सिर पर बाल न होने की वजह से कई बार रिजेक्शन झेल चुके अनुपम खेर कभी डिप्रेशन का शिकार भी हो चुके हैं। उन्होंने खुद को साबित करने के लिए कई रातें प्लेटफॉर्म पर बिताईं और कई बार भूखे पेट सोना पड़ा।

मां ने गहने बेचकर की पढ़ाई पूरी
अनुपम खेर का जन्म 7 मार्च 1955 को शिमला में हुआ था। उनके पिता वन विभाग में क्लर्क थे और केवल 90 रुपये महीना कमाते थे। बावजूद इसके, उनकी मां ने बेटे की पढ़ाई के लिए अपने गहने तक बेच दिए। लेकिन अनुपम की किस्मत में कुछ और ही लिखा था। एक्टिंग का जुनून उन्हें चंडीगढ़ ले आया जहां उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी में थिएटर जॉइन कर लिया।

NSD से मिली उड़ान, लेकिन सफर रहा संघर्षपूर्ण
पंजाब यूनिवर्सिटी के बाद उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से ट्रेनिंग ली। इसके बाद अनुपम मुंबई आए जहां उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखने की कोशिश की। हालांकि, बाल न होने की वजह से उन्हें कई बार ठुकराया गया और वे डिप्रेशन तक में चले गए।

DDLJ के बाबूजी से लेकर हॉलीवुड तक का सफर
अनुपम खेर ने बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक फिल्मों में यादगार किरदार निभाए। डीडीएलजे के बाबूजी हों या सारांश का इमोशनल रोल — हर भूमिका में उन्होंने अपनी गहरी छाप छोड़ी। आज वह 500 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं और हॉलीवुड फिल्मों का भी हिस्सा बन चुके हैं। साथ ही वे दो बार नेशनल अवार्ड भी जीत चुके हैं।

वर्तमान में ‘तन्वी: द ग्रेट’ में नजर आ रहे हैं
अनुपम खेर इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘तन्वी: द ग्रेट’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में भी वह एक चुनौतीपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं जो उनके संघर्ष और अभिनय कौशल को दर्शाती है।

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