सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल:  फिल्मों के सुपरहिट डायरेक्टर अनीस बज्मी, जिन्होंने ‘वेलकम’, ‘नो एंट्री’, और ‘भूल भुलैया 2’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं, का जीवन संघर्ष से भरा रहा है। एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले अनीस ने अपनी जिंदगी के शुरुआती दौर में पैसों की तंगी के कारण कई छोटे-मोटे काम किए। उन्होंने फिल्म सेट पर स्पीकर ढोने से लेकर फिल्मों के लिए बिना क्रेडिट के कहानियां लिखीं।

पहला ब्रेक फिल्म ‘स्वर्ग’ से
अनीस ने 1990 में राजेश खन्ना और गोविंदा स्टारर फिल्म ‘स्वर्ग’ के लिए स्क्रीनप्ले लिखा, जिसके बाद उन्हें पहली बार क्रेडिट मिला। इससे पहले, उन्होंने कई फिल्मों के लिए घोस्ट राइटिंग की थी, लेकिन उन्हें पहचान नहीं मिल पाई थी।

राज कपूर से मिली सीख
अनीस ने फिल्म निर्देशन की बारीकियां राज कपूर से सीखीं। वे ‘प्रेम रोग’ जैसी फिल्म में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर चुके हैं। 1995 में उन्होंने पहली बार फिल्म ‘हलचल’ को डायरेक्ट किया, लेकिन असली सफलता 2005 में आई फिल्म ‘नो एंट्री’ से मिली। इसके बाद ‘वेलकम’, ‘सिंह इज किंग’ और ‘रेडी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें कॉमेडी फिल्मों का बादशाह बना दिया।

संघर्ष के दिनों की यादें
अनीस बज्मी ने अपने संघर्ष के दिनों में 30 से ज्यादा घर बदले, क्योंकि हर साल किराया बढ़ता था। उनकी मां और पिता ने हमेशा उनका साथ दिया। उनकी मां रात-रात भर उनके लिए चाय लेकर खड़ी रहती थीं, जब वह कहानियां लिखते थे।

यह कहानी अनीस बज्मी के संघर्ष, मेहनत, और सफलता की मिसाल है, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में एक बड़े डायरेक्टर के रूप में स्थापित किया।