सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर में विगत दो दिनों से चल रही अखिल भारतीय शैक्षिक सांस्कृतिक व खेल स्पर्धाओं का समापन 40 प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान करने के साथ सम्पन्न हुआ।
17 स्वर्ण व 8 रजत के साथ केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर परिसर प्रथम 8 स्वर्ण व 9 रजत के साथ केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर द्वितीय 7 स्वर्ण व 4 रजत के साथ श्रीमद दयानंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय चोटीपुरा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
समापन सत्र के प्रारंभ में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर के सह निदेशक नीलाभ तिवारी ने समस्त अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह की स्पर्धाओं से विद्यार्थियों का भौतिक, आध्यात्मिक, भाविक आदि पंचविध विकास होता है। अखिल भारतीय क्रीड़ा सांस्कृतिक शैक्षिक स्पर्धा के संयोजक प्रो. भारत भूषण मिश्रा ने विगत तीन दिन से चल रही प्रतियोगिताओं का संपूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अभिराज राजेंद्र मिश्र, पूर्व कुलपति, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी, ने कहा कि संस्कृत के शिक्षकों व छात्र-छात्राओं के ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि वह न केवल इस भाषा के भंडार को सहेज कर रखें बल्कि साथ ही साथ इस भंडार में स्वयं की सृजनशीलता के साथ बढ़ोतरी करते रहें। संस्कृत भाषा में वर्णित ज्ञान एकमात्र ऐसी शक्ति है जो भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने में सक्षम है। हमारी सभ्यता अत्यंत ही विकसित रही है हमारे शास्त्र, उपनिषद, पुराण, स्मृतियां इस बात का प्रमाण हैं। आवश्यकता है कि संस्कृत भाषा में वर्णित इस ज्ञान का विशिष्ट अध्ययन विश्लेषण करते हुए उसे वर्तमान समय के अनुसार स्थापित करते हुए उपयोग करें।
कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि शिशिर कुमार पांडेय, कुलपति, जगतगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट ने कहा कि पाठ्य सहगामी गतिविधियां अत्यंत ही महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि इनके अभ्यास से व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक संतुलन स्थापित होता है। स्वस्थ मन एवं स्वस्थ तन के संयोग से ही व्यक्ति जीवन के अन्य पक्षों में सक्रिय कार्य कर पाता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रा. गा. मुरली कृष्ण, कुलसचिव, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई
नई दिल्ली ने बताया कि यह अत्यंत ही गर्व का विषय है कि संस्कृत के छात्र शास्त्र अध्ययन के साथ. साथ अपने व्यक्तित्व के चंहुमुखी विकास हेतु विश्ववि‌द्यालय द्वारा की जा रही सभी गतिविधियों में बढ़. चढ़कर हिस्सा लेते हैं एवं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय संस्कृत विश्ववि‌द्यालय नई दिल्ली द्वारा दक्षिण, पश्चिम, पूर्व, उत्तर देश की इन चारों ही दिशाओं में इसी प्रकार अखिल भारतीय शैक्षिक सांस्कृतिक व क्रीडा स्पर्धाएं आयोजित की जा रही है जिनमें इन क्षेत्रों के विभिन्न संस्कृत संस्थाओं के दल भाग ले रहे हैं एवं खेल के मैदान तथा मंच पर अभूतपूर्व प्रदर्शन कर रहे हैं। सम्मानित अतिथि के रूप में सत्यजीत पांडेय वरिष्ठ संस्कृत विद्वान उपस्थित रहे।
समापन समारोह के अध्यक्ष केंद्रीय संस्कृत विश्ववि‌द्यालय भोपाल परिसर के निदेशक प्रो रमाकांत पांडेय ने अपने अध्यक्षीय उ‌द्बोधन में समस्त प्रतिभागियों व उनके मार्गदर्शकों को इस आयोजन में भाग लेने एवं इसको सफल बनाने हेतु बधाई दी। उन्होंने आयोजन समिति के संयोजक व सभी समितियों के समस्त सदस्यों को भी सफल आयोजन के लिए बधाई दी एवं कहा कि पुस्तकों व शास्त्रों से अर्जित ज्ञान व्यवहारिक जीवन में किस प्रकार उतारा जाए यह ऐसी स्पर्धाओं में भाग लेने पर सीखा जाता है, जब व्यवहारिक स्थिति सामने आने पर हम बु‌द्धिमता पूर्ण व्यवहार करते हुए उचित निर्णय लेते हैं एवं अनुभव प्राप्त करते हैं।
इस प्रकार के पाठ्येतर गतिविधियों के आयोजन हमारे व्यक्तित्व निर्माण में अत्यंत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नव दिल्ली के कुलगुरु श्रीनिवास बरखेड़ी को धन्यवाद देते हुए कहा कि संपूर्ण भारतवर्ष की प्रत्येक दिशा में संस्कृत विश्ववि‌द्यालयों व संस्थाओं के लिए इस प्रकार के आयोजन करते हुए वह संस्कृत के प्रचार प्रसार एवं इसे सामान्य जनता तक पहुंचाने हेतु अभूतपूर्व प्रयास कर रहे हैं।
इस अवसर पर भोपाल परिसर द्वारा प्रकाशित शास्त्र मीमांसा नामक शोध पत्रिका का लोकार्पण भी किया गया। सम्मानित अतिथियों ने सभी मार्गदर्शकों को सम्मानित किया। प्रो धर्मेंद्र कुमार
सिंह देव ने पुरस्कार वितरण हेतु सभी विजेताओं की घोषणा की। समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन डा. मोहिनी अरोड़ा ने किया तथा इस सत्र का संचालन प्रदीप कुमार  पांडेय का रहा।

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