सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एएलआईएमसीओ), जो सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत एक मिनिरत्न पीएसयू है, ने आज अपने 53वें स्थापना दिवस पर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया। इस अवसर पर संस्था ने अपने ब्रांड का नवीनीकरण प्रस्तुत किया और उच्च-प्रौद्योगिकी वाली नई मोबिलिटी समाधानों की लॉन्चिंग की।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री, डॉ. वीरेन्द्र कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने एनआईडी अहमदाबाद द्वारा डिज़ाइन की गई एएलआईएमसीओ की नई कॉरपोरेट पहचान का अनावरण किया। साथ ही दो अत्याधुनिक उत्पादों—एक 3-व्हीलर ईवी स्कूटर और एक क्लिप-ऑन मोटराइज्ड व्हीलचेयर डिवाइस—का भी शुभारंभ किया गया।
तकनीक-प्रधान समावेशन का नया युग
नव लॉन्च किया गया 3-व्हीलर ईवी स्कूटर भारतीय भू-भाग के अनुरूप एक सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और मजबूत मोबिलिटी समाधान प्रदान करता है। वहीं क्लिप-ऑन मोटराइज्ड डिवाइस एक अत्यंत परिवर्तनकारी उत्पाद है जो किसी भी मानक मैनुअल व्हीलचेयर को कुछ ही सेकंड में मोटराइज्ड वाहन में बदल देता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को किफायती स्वतंत्रता मिलती है।
कार्यक्रम में बोलते हुए, डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने एएलआईएमसीओ की परिवर्तनकारी यात्रा को याद करते हुए कहा कि 53 वर्षों की सेवा में यह संगठन एक विनिर्माण इकाई से विकसित होकर एक राष्ट्रीय संस्था बन चुका है, जो “करुणा के साथ नवाचार” का प्रतीक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विभिन्न सरकारी पहलियों के माध्यम से 32 लाख से अधिक दिव्यांग लाभार्थियों को सहायता मिली है और एएलआईएमसीओ यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है कि उच्च-गुणवत्ता वाले सहायक उपकरण देश के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुँचें।
श्री बी. एल. वर्मा, राज्य मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, ने इस अवसर को केवल एक मील का पत्थर नहीं बल्कि “करुणा और सामूहिक उद्देश्य का उत्सव” बताया। उन्होंने कहा कि लॉन्च किए गए ये नए उपकरण सिर्फ इंजीनियरिंग उत्पाद नहीं हैं, बल्कि स्वतंत्रता, गरिमा और गतिशीलता के शक्तिशाली साधन हैं, जो समावेशी और सुलभ प्रौद्योगिकी में भारत के बढ़ते नेतृत्व को दर्शाते हैं।
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण था सुश्री मनमीत कौर नंदा, अतिरिक्त सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा दिया गया प्रेरक संबोधन। उन्होंने कहा कि एएलआईएमसीओ को केवल एक उत्पादन संगठन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि एक जीवंत संस्था के रूप में जो भारत की आत्मनिर्भरता, समावेशन और सामाजिक न्याय की दृष्टि को आगे बढ़ाती है।
उन्होंने इस दिन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया, क्योंकि नए लोगो का अनावरण और दो नई मोबिलिटी नवाचारों का लॉन्च एएलआईएमसीओ की यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि संस्था का वास्तविक मूल्य मशीनों से नहीं, बल्कि उन ज़िंदगियों से परिभाषित होता है जिन्हें वह छूती है।
कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित फिल्म में दिखाईं गई प्रेरक कहानियों को याद करते हुए उन्होंने सुश्री सरिता त्रिवेदी का उल्लेख किया, जो एक ट्रिपल एम्प्यूटी होने के बावजूद कला के क्षेत्र में राष्ट्र के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने एक ऐसे बीएसएफ अधिकारी की कहानी भी साझा की, जिन्होंने अपने अंगों के खो जाने और सक्रिय जीवन छोड़ने की चिकित्सकीय सलाह के बावजूद इंडोनेशिया के विश्व नंबर 1 पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी को हराकर अदम्य साहस का परिचय दिया।
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