सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : देश में एविएशन सेक्टर पर बढ़ती ऑपरेशन लागत और महंगे एविएशन टर्बाइन फ्यूल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों में करीब 22% तक कटौती करने का फैसला लिया है, जबकि इंडिगो भी लगभग 7% फ्लाइट्स कम करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि बढ़ते खर्च और कम मुनाफे के दबाव के चलते एयरलाइंस यह कदम उठा रही हैं।
एयरलाइन कंपनियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में फ्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा एयरपोर्ट चार्ज, मेंटेनेंस कॉस्ट और अन्य ऑपरेशनल खर्च भी तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में कंपनियां लागत नियंत्रित करने के लिए उड़ानों की संख्या सीमित कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उड़ानों में कटौती का सीधा असर यात्रियों पर पड़ सकता है। फ्लाइट्स कम होने से टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है, खासकर त्योहारों और छुट्टियों के सीजन में यात्रियों को महंगे किराए का सामना करना पड़ सकता है।
एयर इंडिया की ओर से जिन रूट्स पर यात्रियों की संख्या कम है, वहां उड़ानों में ज्यादा कटौती की जा सकती है। वहीं इंडिगो भी अपने नेटवर्क और डिमांड के आधार पर शेड्यूल में बदलाव करेगी। हालांकि दोनों एयरलाइंस ने कहा है कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
एविएशन इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, यदि ATF की कीमतों में राहत नहीं मिलती और ऑपरेशन कॉस्ट इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले समय में अन्य एयरलाइंस भी इसी तरह के कदम उठा सकती हैं। इससे पूरे घरेलू विमानन क्षेत्र पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारत में हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन बढ़ती लागत एयरलाइंस के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में कंपनियां खर्च घटाने और लाभ संतुलित रखने के लिए नई रणनीतियों पर काम कर रही हैं।
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