सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक अजय सिंह के कुशल नेतृत्व में, संस्थान वैज्ञानिक प्रगति और ज्ञान के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसी प्रतिबद्धता के तहत, एम्स भोपाल की शिशु रोग विभाग की प्रोफेसर भावना ढींगरा ने लक्ज़मबर्ग में आयोजित इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नियोनेटल स्क्रीनिंग के 13वें सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने नवजात शिशुओं में सामान्य चयापचय संबंधी विकारों और हीमोग्लोबिनोपैथी की स्क्रीनिंग पर अपना शोध प्रस्तुत किया। इस सम्मेलन में दुनिया भर से 100 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया और उनके कार्य को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय द्वारा अत्यधिक सराहा गया।
विकसित देशों में नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया है, जिससे जन्मजात और चयापचय संबंधी विकारों की शीघ्र पहचान और उपचार संभव हो पाता है। हालांकि, भारत में अब तक सार्वभौमिक नवजात स्क्रीनिंग कार्यक्रम लागू नहीं हुआ है। एम्स भोपाल ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के सहयोग से सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में मध्य भारत की पहली नवजात स्क्रीनिंग सुविधा स्थापित की है।
प्रो. अजय सिंह ने इस उपलब्धि की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, “नवजात स्क्रीनिंग एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल है, जो जन्मजात विकारों के शीघ्र निदान और उपचार द्वारा नवजात शिशुओं का जीवन बचा सकती है। एम्स भोपाल नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने और शिशु रोग चिकित्सा में नए मानदंड स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। निदेशक भावना ढींगरा का वैश्विक मंच पर योगदान हमारे संस्थान की चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार के प्रति समर्पण को दर्शाता है।”

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