आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नागदा को जिला बनाने की मांग को लेकर नागदा से एक पदयात्रा प्रारंभ हुई, जो उज्जैन, देवास, सोनकच्छ, आष्टा, सीहोर, बैरागढ़ होते हुए 11 दिन में 255 किमी का सफर तय कर 12 वे दिन भोपाल पहुंची उसके बाद राय मार्केट पर 5 लोगों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलवाने लेकर गए पुलिसकर्मी प्रतिनिधिमंडल यात्रा संयोजक बसंत मालपानी ने बताया की नागदा को जिला बनाने की मांग पिछले 15 वर्षों से उठ रही है, वर्ष 2013 व वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री नागदा में सभा के दौरान नागदा को जिला बनाने की घोषणा कर चूकें है, फिर भी नागदा अब तक जिला नही बन पाया। नागदा को जिला बनाने का प्रस्ताव 18 मार्च 2020 को कमलनाथ सरकार में पास हो गया था। आर.टी.आई. से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त प्रस्ताव अभी भी अस्तिस्व में है। पिछले 3 वर्षों से मध्यप्रदेश में शिवराज की सरकार है फिर भी नागदा को जिला बनाने का प्रस्ताव अधर में लटका हुआ है। यदि शिवराजसिंह अपनी घोषणा को पूरा करते हुए कमलनाथ सरकार के नागदा को जिला बनाने के प्रस्ताव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए दावे आपत्ति की प्रक्रिया प्रारंभ कर देते है तो नागदा के जिला बनने का मार्ग प्रशस्त हो जायेगा। मालपानी ने आगे बताया की ये पदयात्रा पूर्ण रूप से गैर राजनैतिक पदयात्रा है ,पूर्व नगर की करीब 100 राजनैतिक व सामाजिक संस्थाओं ने मुख्यमंत्री के नाम से नागदा को जिला बनाने के मांगपत्र और हजारों व्यक्तिगत समर्थन पत्र हमको नगरवासियों ने जनमत संग्रह के रूप में सौंपे थे। उक्त जनमत संग्रह और नागदा को जिला बनाने का आवेदन सोपने हम भोपाल मुख्यमंत्री आवास पर जा रहे है। नागदा से कम आबादी वाले शहर जिले बन सकते है तो हमारा नागदा क्यों नहीं |
पदयात्रा संयोजक बसंत मालपानी ने बताया की 2011 में हुई जनगणना के मान से हमारे नागदा शहर की कुल आबादी 1 लाख है जबकि अभी हाल में बनाए गए जिले मऊगंज की शहर की कुल आबादी 26 हजार 420 है जिसकी तुलना में नागदा की आबादी 4 गुना है । पूर्व में जब आगर जिला बना था तब आगर शहर की कुल आबादी 37 हजार 917 थी जिससे नागदा की आबादी करीब 3 गुना है, फिर भी नागदा को जिला नही बनाया गया। प्रस्तावित नागदा जिले में नागदा, आलोट, खाचरोद, महिदपुर तहसील को जोडा जाना है जिसकी कुल आबादी 7 लाख 74 हजार है, जबकि वर्तमान में बनाए गए मऊगंज जिले की कुल आबादी 6,16,645 है |